उन सवालों पर रोशनी डालता है जिन पर लोग खुलकर बात नहीं कर पाते। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर क्यों होते हैं, ऐसे लोग बाहर से इतने सामान्य और खुशमिजाज क्यों दिखते हैं, और शक की एक छोटी सी चिंगारी कैसे पूरे परिवार को उलझन में डाल देती है। गुरुदेव इस चर्चा में स्पष्ट करते हैं कि कई बार व्यक्ति न तो परिवार छोड़ पाता है और न ही बाहरी रिश्ते से बाहर निकल पाता है, क्योंकि दोनों ही उसकी मानसिक और शारीरिक जरूरत बन चुके होते हैं।
ज्योतिष के गहरे नियमों के अनुसार शनि, बुध, सूर्य, राहु और शुक्र की कुछ विशेष स्थितियां व्यक्ति की वाणी, सोच और इच्छाओं को इस दिशा में मोड़ देती हैं। राहु का प्रभाव मन को भटकाता है, शुक्र काम-सुख की चाह बढ़ाता है, और चंद्र की कमजोरी भावनात्मक अस्थिरता पैदा करती है। यही कारण है कि संस्कारी दिखने वाला व्यक्ति भी भीतर ही भीतर संघर्ष कर रहा होता है।
गुरुदेव यह भी बताते हैं कि हर मामला नैतिक उपदेश से नहीं, बल्कि सही ज्योतिषीय उपायों से संभलता है। चंद्र मंगल को शांत करने के उपाय, शिव साधना और कुंडली में मौजूद दोषों की पहचान कैसे बड़े नुकसान से बचा सकती है, यह सब इस वीडियो में विस्तार से समझाया गया है। यदि रिश्तों में बार बार धोखा, शक या टूटन सामने आ रही है, तो यह वीडियो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।
जितनों के भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हैं
बेटा वो बड़े खुशदिल होते हैं। जब शक वाली
यह सुई होने लगती है, घूमने लगती है, अब
वो ना उसे छोड़ सकता है, ना उसे छोड़ सकता
है। शनि और बुध इकट्ठे हो और ठीक-ठाक घर
में बैठे हो उसके लिए तो साफ तौर पे
ज्योतिष में लिखा है कि आवाज मार के ही
लड़की को ले उड़ेगा। और यही सेम चीज
लड़कियों में भी होती है। इस तरह के आपके
घर में भी कोई भी शख्स है चाहे औरत
[संगीत] है, चाहे आदमी है। तो चंद्र मंगल
अच्छा कर लीजिए। चंद्र मंगल अच्छा करने का
एक ही तरीका है।
लेकिन एक तरफ वो लोग भी हैं जो अच्छा कर
रहे हैं जीवन में अच्छे इंसान हैं। लेकिन
फिर भी उनको कोई जीवन साथी नहीं मिल रहा।
इन लोगों के जब तक कि एस्ट्रोलॉजिकल उपाय
ना हो जाए जो चीज बाधा है तो या तो उसको
ना उसको हटाया जाए या फिर जो योग है नहीं
उपायों के द्वारा वो योग बनाया जाए तब
जाके इनकी शादियां होती हैं वैसे नहीं
होती।
कैसे पता करें कि आपका जो पार्टनर है वो
चीटर है या फिर उसके एक्स्ट्रा मैरिटल
अफेयर्स हैं? यह सबसे ज्यादा
कॉम्प्लिकेटेड सवाल है
क्योंकि इस जवाब को ढूंढ पाना या तो आदमी
पकड़ा जाए तब जवाब है। और नहीं तो वैसे
अगर आप ढूंढने निकलो तो कहीं इसका जवाब
नहीं है। वो क्यों नहीं है?
मैं तुम्हें एक बात बताता हूं।
हम मान लो रेड लाइट पर खड़े हैं।
एक आकर के भिखारी हमें इरिटेट कर देता है।
या तो उसे जबरदस्ती कोई कुछ देके पीछा
छुड़ाता है। समझ गए? और या उसे वैसे डांडा
डबड़ के भगाता है। दफा हो जा यहां से। है
ना?
लेकिन एक आता है वह बड़े अजीब से प्यारे
से एक्सप्रेशन देकर के वो भीख ही मांग रहा
होता है। वो अंदर बैठा हुआ आदमी
मुस्कुराता हुआ उसे कुछ ना कुछ दे देता
है। है ना? ये दो फर्क है। इसको कैसे भी
किसी भी एग्जांपल के साथ जोड़ लो।
इसी प्रकार से जीवन के अंदर
जितनों के भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हैं
बड़ा वो बड़े खुशदिल होते हैं
समझे ना और जिम्मेवारियां निभाने वाले
होते हैं। हर हिस्से को प्रॉपर लेकर के
चलने वाले होते हैं और पता भी नहीं चलने
देते।
वो सारी जिम्मेवारियों को बड़ा हंसहंस के
निभा रहे होते हैं। तो इसलिए पता नहीं
चलता।
लेकिन उसके अंदर उल्टा प्रॉब्लम कहां से
शुरू होती है? जब शक वाली यह सुई होने
लगती है, घूमने लगती है, अब वो ना उसे
छोड़ सकता है, ना उसे छोड़ सकता है।
जिम्मेवारी वो भी है, जिम्मेवारी वो भी
है। अब ये मर्द और औरतों दोनों पे बराबर
का चल रहा है। दोनों के ऊपर ही। तो लेकिन
ये एक तरह की उनकी ना मेंटली और फिजिकल
नीड होती है। वो नहीं रह पाते इसके बिना।
में यही कारण है कि आज युगों शताब्दियां
बीत गई। यह चीज ना कभी बंद हुई है और ना
कभी आगे युगों शताब्दियों तक बंद होनी है।
उसका कारण
मान लीजिए किसी का सूर्य अकेला दूसरे घर
में है। अब वहां बन गया शुक्र का पितृ शक।
लेकिन यह सूर्य इतना अच्छा होता है कि
अपने भाई, बहन, ससुराल, जीवन साथी, अड़ोसी
पड़ोसी सबकी मदद करके उनको पार उतारता है।
तो कितना अच्छा इंसान है यह। लेकिन यह दो
चार जगह संबंध बनाए बिना रह ही नहीं सकता।
यह इसकी फिजिकल या मेंटली नीड है। राहु
सातवें में हो।
हर वक्त दिमाग के अंदर विपरीत लिंगी घुसा
ही रहता है। इसको चाहत है। इसको एक छोटी
सी छूट कहीं से मिली बेटा इसने जुड़ ही
जाना है। शुक्र शुक्र चौथे घर में हो।
दूसरा और सातवां घर खाली हो। आदमी जहां
जाएगा चाहे पैसे खर्च करके उसे सेक्स करके
आना पड़े वह करके आता है। और नहीं तो कोई
ना कोई साथी तो उस दूसरे शहर में भी ढूंढ
ही लेता है। है ना? शनि और बुध इकट्ठे हो
और ठीक-ठाक घर में बैठे हो उसके लिए तो
साफ तौर पर ज्योतिष में लिखा है कि आवाज
मार के ही लड़की को ले उड़ेगा।
यानी कि उसकी वाणी में ही कुछ ऐसा होता है
कि वो सामने वाले विपरीत लिंगी को बड़े
आराम से समझा देता है कि हां मैं तैयार
हूं। तुम तैयार हो तो आ जाओ। ठीक है? ये
सारी चीजें और यही सेम चीज लड़कियों में
भी होती है। और सेम लड़कों में भी होती
है। उसके आगे आ जाओ। फिर शुक्र नौवें घर
के अंदर अकेला हो। और अगर चंद्रमा अच्छी
जगह नहीं बैठा यह बच्चे छोटी उम्र से 15
17 साल की उम्र से ही यह शराब नशे में भी
उतरने लगते हैं और खासतौर पे यह बहाना
ढूंढते हैं कि घर से दूर जाकर पड़ेंगे।
ठीक है? और वहां पर यह शराब भी सिगरेट भी
कोई ना कोई नशा भी और साथ में विपरीत
लिंगी का सुख ये पाना शुरू कर देते हैं।
शुक्रवें घर में हो। पहले और पांचवें घर
के अंदर कोई भी ग्रह हो। है ना? यह तो रुक
ही नहीं सकते ना। इन्होंने जिंदगी की पूरी
मौज मस्ती लेनी है। समझना नहीं रुक सकते।
शुक्र, शनि केतु यह शुक्र, शनि 12व घर में
नौवें घर के अंदर हो। ठीक है? अब भाषा तो
ऐसी लिखी है एक शब्द में समझाने की बात हो
तो उसमें लिखा तो अब बस ही जाएगी
कहीं ना कहीं। यानी कि उसने जिंदगी के
अंदर सारे कर्म किए लेकिन शादी जरूर करके
बस जाएगी। संस्कारवान दिखेगी। ठीक है? अब
ये होता कहां है? यह होता तो हमारे फील
में मानसिकता के शरीर के अंदर गुदगुदी के
कारण यह होता है और जब शरीर के अंदर से
कोई डिमांड पैदा होती है तो बाहर आदमी की
आंखें उसी को ढूंढती है। करा क्या जाए?
इसको कौन समझाएगा? लेकिन इसके मां-बाप की
चाहत क्या इसकी शादी ना करे? उसके भाई बहन
की चाहत यह संस्कारी हो। ठीक है? उसके
जीवन साथी की चाहत यह मेरे प्रति वफादार
हो। लेकिन उसके शरीर के अंदर की उसकी
मानसिकता की चाहत क्या है? यह यह तो वो
किसी को बता भी नहीं सकता। बस जब अकेला
होगा ढूंढ लेगा।
यह रीजन है कि यह चीज नहीं बंद हो पाती।
अब इस चीज से त्रस्त
मियां बीवी दोनों आते हैं मेरे पास। कभी
बीवी कसूरवार होती है और मियां कहता है
कहता है मेरे साथ तो इसने ऐसा कर दिया।
मैंने इसे एक बार पहले माफ़ किया था। दूसरी
बार तब किया था। तीसरी बार अब यह फिर यही
गलती कर रही है। कब तक करूं? कहता है मैं
छोड़ सकता नहीं। मेरे बच्चे बड़े
ठीक है। कभी बीवी आती है कहती जहां देखो
वहां शुरू हो जाते हैं। पहले इनका मेरी
बहन के साथ था। बाद में अब इन्होंने बाहर
वो कोई देख ली। कोई आता है कोई कहता है
मेरी सेक्रेटरी रख ली इन्होंने तो उसके
साथ यह लगे हुए हैं। यह रोज के खेल हैं।
इस चीज को ठीक किया जा सकता है। बस एक दो
बातें समझानी होती हैं कि इसकी वजह से
उसको नुकसान क्या हो रहा है और एक या दो
उपाय होते हैं जो कि इस लाइन से वापस ले
आते हैं। और अगर इस तरह के आपके घर में भी
कोई भी शख्स है चाहे औरत है चाहे आदमी है।
तो चंद्र मंगल अच्छा कर लीजिए।
चंद्र मंगल अच्छा करने का एक ही तरीका है
कि रोज
दूध, पानी और शहद
यह मिलाइए और रोज शिवलिंग पे चढ़ाइए।
और उसके साथ में जो मीठी फुलियां होती है
ना मीठी खील जिनके ऊपर चीनी चढ़ी होती है
यह हर रोज मंदिर जाकर प्रसाद वाले प्रात
में डाल दीजिए वो बढ़ता रहेगा। यह दो उपाय
करके देखिए।
मैं यह तो नहीं कहता कि खत्म हो जाएगा।
लेकिन यह भावना जो 100% है ना वो 10% पे
जरूर आ जाएगी। और यह 10% भी आ गई तो बेटा
बहुत बड़े बचाव हो जाएंगे। बहुत बड़े और
अगर बिल्कुल बिगड़ा हुआ रूप जिसे कहते हैं
शुक्र राहु का मेल राहु का सातवें स्थान
में शुक्र का पितृदोष अगर यह बड़ी-बड़ी
चीजें हैं यह बिना सिचुएशन देखे और बिना
उस पूरे सिम्टम्स के उपाय किए बिना यह ठीक
नहीं होती ठीक है तो उस सिचुएशन में आपको
किसी अच्छे एस्ट्रोलॉजर को मिलना ही
पड़ेगा या एस्ट्रो साइंस पे जाइए उस इंसान
की डेट ऑफ बर्थ टाइम बर्थ प्लेस डालिए ऐप
के अंदर ठीक है डालिए आप देखिए कि अगर
आपको लग रहा है कि यह ऐसा ही है और आपने
देख भी लिया आपको सामने लिखा मिलेगा
और यह जो इसका कर्म है या तो लिखा मिलेगा
कि आपके संबंध कहीं और होंगे और वह आपके
लिए बहुत लकी साबित होगा और आपके लिए जीवन
में फायदा देगा। या तो यह इस तरह की भाषा
लिखी मिलेगी और या फिर यह लिखा मिलेगा कि
आप इस तरह के संबंध में होंगे। इसका
खामियाजा आपके जीवन साथी को भी भुगतना
पड़ेगा। उसकी शारीरिक सर्वे और आपके भी
रुपए पैसे प्रॉपर्टी स्वास्थ्य और आपके
हालात जो कि खराब होने वाले हैं या हो
चुके हैं वह आपको पेट लिखे मिलेंगे कि यह
वाले हालात आपके हो चुके होंगे।
तो यह वाला जो सुख है शारीरिक सुख बेटा
इसके अंदर आदमी ढूंढता तो मानसिक सुख है
लेकिन यह शारीरिक सुख के साथ जुड़ा हुआ है
हो और यह जो चीज यह दुख देने वाली भी होती
है और सुख देने वाली भी होती है। अब किसकी
किस्मत में सुख देने वाली है? तो बेटा वह
तो सारे मस्त है। लगे हुए हैं। और जिसकी
दुख देने वाली है उसका घर नर्क बन चुका
है। उसकी कमाई नर्क बन चुकी है। उसका शरीर
नर्क बन चुका है। समझ गए ना? तो यह एक ऐसी
चीज है आप किसी को समझा के रोक दो यह नहीं
है। क्योंकि प्रवचन देने वाले स्वयं इसमें
लिप्त है और प्रवचन सुनने वाले लिप्त हैं।
वो वहीं वहीं बस ठीक है। जैसे ही उठ के
बाहर निकलते हैं उनका फिर अपना जीवन और यह
जो मन से उठने वाली ये जो विचार है ना यह
उनको जीने नहीं देते। वहीं पर ले जाके फिर
खड़ा कर देते हैं। इसीलिए अपनी-अपनी जन्म
कुंडली दिखाते रहो और सुखी रहो। मैं इतना
ही बोल सकता हूं। और या फिर यह जो मैंने
दूध, पानी, शहद का जो उपाय बताया है, इसको
आजमा के देखिए। देखिए कितना फर्क पड़ता
है।
गुरुदेव एक तरफ तो ऐसे लोग हैं जिनके पास
लड़कियों की कमी नहीं है या ऐसी लड़कियां
हैं जिनके पास लड़कों की कमी नहीं है।
लेकिन एक तरफ वो लोग भी हैं जो अच्छा कर
रहे हैं जीवन में। अच्छे इंसान हैं। लेकिन
फिर भी उनको कोई जीवन साथी नहीं मिल रहा।
उनको लड़का नहीं मिल रहा, लड़की नहीं मिल
रही। तो उन लोगों के लिए क्या उपाय है? उन
लोगों को क्या करना चाहिए? बेटा पहले तो
मैं इसका जवाब दे दूं। हरियाणा में एक
कहावत है। ढे ढेर तो गंगा जी पे टोले है।
यानी कि अपनी मानसिकता के इंसान को इंसान
कहीं भी खोज लेता है।
मान लो जिनके पास बहुत लड़के हैं या जिनके
पास बहुत लड़कियां हैं। वो चाहते ही इनको
है।
समझ गए ना? तो उनको मिल भी जाते। ये जो
बेचारे बिल्कुल सीधे साफ और अच्छे कर्म
करने वाले इनकी मानसिकता यही है कि एक
बहुत अच्छा वफादार जीवन साथी हमें कोई मिल
जाए
जी
बेटा ये दुनिया में संख्या ही कम है तो
उनको ढूंढने में बड़ी तकलीफ होती है। या
तो मां-बाप संस्कारी घर से ढूंढ के साथ
में लगा देते हैं और अगर मां-बाप और
रिश्तेदार भी इसमें सपोर्ट ना करें बड़ा
मुश्किल हो जाता है। ये सच्चाई है। दुनिया
की सच्चाई को देखते हुए बेटा वह बहुत
देर-देर लगाते हैं रिश्तों को ढूंढने में।
ठीक है? कई बार तो यह होता है और या फिर
अगर जन्म कुंडली के 10वें दूसरे और छठे घर
में मैक्सिमम ग्रह बैठे हुए हैं तो बेटा
ऐसा इंसान सिर्फ काम और अच्छे काम करने के
लिए पैदा होता है। वो शादीशुदा जिंदगी के
सुख भोगने के लिए तो पैदा ही नहीं हुआ
होता। ठीक है ना? तो उस अवस्था के अंदर
बेटा यह लोग काम में अपने काम के पैकेज
में सुख कमाने में दुनियादारी के अंदर
अच्छा चलने में इनके कोई कमी नहीं होती।
लेकिन इनके नसीब में नहीं होता कि विपरीत
लिंगी का सुख इनको मिले। उनकी शादियां तय
होती हैं, टूट जाती हैं। देखने जाते हैं,
पूरी बात बनती है। एंड पे जाकर सामने वाले
मना कर देते हैं या देखने जाते हैं, उसको
एंड तक चलते या देखते हैं और लास्ट में
इनको कोई कमी नजर आती है या स्वयं तोड़
देते हैं। इस तरह के हालात जीवन में चलते
ही रहते हैं। इन लोगों के जब तक कि
एस्ट्रोलॉजिकल उपाय ना हो जाए, जो चीज
बाधा है, या तो उसको ना उसको हटाया जाए या
फिर जो योग है नहीं, उपायों के द्वारा वह
योग बनाया जाए। हम तब जाके इनकी शादियां
होती हैं वैसे नहीं होती और जो जिनके पास
बहुत सारे हैं बेटा उनको कोई जरूरत भी
नहीं होती।
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