Wednesday, 18 February 2026

कुंडली में कौन से ग्रह बनाते हैं बेवफाई के योग? Extra Marital Affair का पूरा सच

 

उन सवालों पर रोशनी डालता है जिन पर लोग खुलकर बात नहीं कर पाते। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर क्यों होते हैं, ऐसे लोग बाहर से इतने सामान्य और खुशमिजाज क्यों दिखते हैं, और शक की एक छोटी सी चिंगारी कैसे पूरे परिवार को उलझन में डाल देती है। गुरुदेव इस चर्चा में स्पष्ट करते हैं कि कई बार व्यक्ति न तो परिवार छोड़ पाता है और न ही बाहरी रिश्ते से बाहर निकल पाता है, क्योंकि दोनों ही उसकी मानसिक और शारीरिक जरूरत बन चुके होते हैं। ज्योतिष के गहरे नियमों के अनुसार शनि, बुध, सूर्य, राहु और शुक्र की कुछ विशेष स्थितियां व्यक्ति की वाणी, सोच और इच्छाओं को इस दिशा में मोड़ देती हैं। राहु का प्रभाव मन को भटकाता है, शुक्र काम-सुख की चाह बढ़ाता है, और चंद्र की कमजोरी भावनात्मक अस्थिरता पैदा करती है। यही कारण है कि संस्कारी दिखने वाला व्यक्ति भी भीतर ही भीतर संघर्ष कर रहा होता है। गुरुदेव यह भी बताते हैं कि हर मामला नैतिक उपदेश से नहीं, बल्कि सही ज्योतिषीय उपायों से संभलता है। चंद्र मंगल को शांत करने के उपाय, शिव साधना और कुंडली में मौजूद दोषों की पहचान कैसे बड़े नुकसान से बचा सकती है, यह सब इस वीडियो में विस्तार से समझाया गया है। यदि रिश्तों में बार बार धोखा, शक या टूटन सामने आ रही है, तो यह वीडियो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। जितनों के भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हैं
बेटा वो बड़े खुशदिल होते हैं। जब शक वाली
यह सुई होने लगती है, घूमने लगती है, अब
वो ना उसे छोड़ सकता है, ना उसे छोड़ सकता
है। शनि और बुध इकट्ठे हो और ठीक-ठाक घर
में बैठे हो उसके लिए तो साफ तौर पे
ज्योतिष में लिखा है कि आवाज मार के ही
लड़की को ले उड़ेगा। और यही सेम चीज
लड़कियों में भी होती है। इस तरह के आपके
घर में भी कोई भी शख्स है चाहे औरत
[संगीत] है, चाहे आदमी है। तो चंद्र मंगल
अच्छा कर लीजिए। चंद्र मंगल अच्छा करने का
एक ही तरीका है।
लेकिन एक तरफ वो लोग भी हैं जो अच्छा कर
रहे हैं जीवन में अच्छे इंसान हैं। लेकिन
फिर भी उनको कोई जीवन साथी नहीं मिल रहा।
इन लोगों के जब तक कि एस्ट्रोलॉजिकल उपाय
ना हो जाए जो चीज बाधा है तो या तो उसको
ना उसको हटाया जाए या फिर जो योग है नहीं
उपायों के द्वारा वो योग बनाया जाए तब
जाके इनकी शादियां होती हैं वैसे नहीं
होती।
कैसे पता करें कि आपका जो पार्टनर है वो
चीटर है या फिर उसके एक्स्ट्रा मैरिटल
अफेयर्स हैं? यह सबसे ज्यादा
कॉम्प्लिकेटेड सवाल है
क्योंकि इस जवाब को ढूंढ पाना या तो आदमी
पकड़ा जाए तब जवाब है। और नहीं तो वैसे
अगर आप ढूंढने निकलो तो कहीं इसका जवाब
नहीं है। वो क्यों नहीं है?
मैं तुम्हें एक बात बताता हूं।
हम मान लो रेड लाइट पर खड़े हैं।
एक आकर के भिखारी हमें इरिटेट कर देता है।
या तो उसे जबरदस्ती कोई कुछ देके पीछा
छुड़ाता है। समझ गए? और या उसे वैसे डांडा
डबड़ के भगाता है। दफा हो जा यहां से। है
ना?
लेकिन एक आता है वह बड़े अजीब से प्यारे
से एक्सप्रेशन देकर के वो भीख ही मांग रहा
होता है। वो अंदर बैठा हुआ आदमी
मुस्कुराता हुआ उसे कुछ ना कुछ दे देता
है। है ना? ये दो फर्क है। इसको कैसे भी
किसी भी एग्जांपल के साथ जोड़ लो।
इसी प्रकार से जीवन के अंदर
जितनों के भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हैं
बड़ा वो बड़े खुशदिल होते हैं
समझे ना और जिम्मेवारियां निभाने वाले
होते हैं। हर हिस्से को प्रॉपर लेकर के
चलने वाले होते हैं और पता भी नहीं चलने
देते।
वो सारी जिम्मेवारियों को बड़ा हंसहंस के
निभा रहे होते हैं। तो इसलिए पता नहीं
चलता।
लेकिन उसके अंदर उल्टा प्रॉब्लम कहां से
शुरू होती है? जब शक वाली यह सुई होने
लगती है, घूमने लगती है, अब वो ना उसे
छोड़ सकता है, ना उसे छोड़ सकता है।
जिम्मेवारी वो भी है, जिम्मेवारी वो भी
है। अब ये मर्द और औरतों दोनों पे बराबर
का चल रहा है। दोनों के ऊपर ही। तो लेकिन
ये एक तरह की उनकी ना मेंटली और फिजिकल
नीड होती है। वो नहीं रह पाते इसके बिना।
में यही कारण है कि आज युगों शताब्दियां
बीत गई। यह चीज ना कभी बंद हुई है और ना
कभी आगे युगों शताब्दियों तक बंद होनी है।
उसका कारण
मान लीजिए किसी का सूर्य अकेला दूसरे घर
में है। अब वहां बन गया शुक्र का पितृ शक।
लेकिन यह सूर्य इतना अच्छा होता है कि
अपने भाई, बहन, ससुराल, जीवन साथी, अड़ोसी
पड़ोसी सबकी मदद करके उनको पार उतारता है।
तो कितना अच्छा इंसान है यह। लेकिन यह दो
चार जगह संबंध बनाए बिना रह ही नहीं सकता।
यह इसकी फिजिकल या मेंटली नीड है। राहु
सातवें में हो।
हर वक्त दिमाग के अंदर विपरीत लिंगी घुसा
ही रहता है। इसको चाहत है। इसको एक छोटी
सी छूट कहीं से मिली बेटा इसने जुड़ ही
जाना है। शुक्र शुक्र चौथे घर में हो।
दूसरा और सातवां घर खाली हो। आदमी जहां
जाएगा चाहे पैसे खर्च करके उसे सेक्स करके
आना पड़े वह करके आता है। और नहीं तो कोई
ना कोई साथी तो उस दूसरे शहर में भी ढूंढ
ही लेता है। है ना? शनि और बुध इकट्ठे हो
और ठीक-ठाक घर में बैठे हो उसके लिए तो
साफ तौर पर ज्योतिष में लिखा है कि आवाज
मार के ही लड़की को ले उड़ेगा।
यानी कि उसकी वाणी में ही कुछ ऐसा होता है
कि वो सामने वाले विपरीत लिंगी को बड़े
आराम से समझा देता है कि हां मैं तैयार
हूं। तुम तैयार हो तो आ जाओ। ठीक है? ये
सारी चीजें और यही सेम चीज लड़कियों में
भी होती है। और सेम लड़कों में भी होती
है। उसके आगे आ जाओ। फिर शुक्र नौवें घर
के अंदर अकेला हो। और अगर चंद्रमा अच्छी
जगह नहीं बैठा यह बच्चे छोटी उम्र से 15
17 साल की उम्र से ही यह शराब नशे में भी
उतरने लगते हैं और खासतौर पे यह बहाना
ढूंढते हैं कि घर से दूर जाकर पड़ेंगे।
ठीक है? और वहां पर यह शराब भी सिगरेट भी
कोई ना कोई नशा भी और साथ में विपरीत
लिंगी का सुख ये पाना शुरू कर देते हैं।
शुक्रवें घर में हो। पहले और पांचवें घर
के अंदर कोई भी ग्रह हो। है ना? यह तो रुक
ही नहीं सकते ना। इन्होंने जिंदगी की पूरी
मौज मस्ती लेनी है। समझना नहीं रुक सकते।
शुक्र, शनि केतु यह शुक्र, शनि 12व घर में
नौवें घर के अंदर हो। ठीक है? अब भाषा तो
ऐसी लिखी है एक शब्द में समझाने की बात हो
तो उसमें लिखा तो अब बस ही जाएगी
कहीं ना कहीं। यानी कि उसने जिंदगी के
अंदर सारे कर्म किए लेकिन शादी जरूर करके
बस जाएगी। संस्कारवान दिखेगी। ठीक है? अब
ये होता कहां है? यह होता तो हमारे फील
में मानसिकता के शरीर के अंदर गुदगुदी के
कारण यह होता है और जब शरीर के अंदर से
कोई डिमांड पैदा होती है तो बाहर आदमी की
आंखें उसी को ढूंढती है। करा क्या जाए?
इसको कौन समझाएगा? लेकिन इसके मां-बाप की
चाहत क्या इसकी शादी ना करे? उसके भाई बहन
की चाहत यह संस्कारी हो। ठीक है? उसके
जीवन साथी की चाहत यह मेरे प्रति वफादार
हो। लेकिन उसके शरीर के अंदर की उसकी
मानसिकता की चाहत क्या है? यह यह तो वो
किसी को बता भी नहीं सकता। बस जब अकेला
होगा ढूंढ लेगा।
यह रीजन है कि यह चीज नहीं बंद हो पाती।
अब इस चीज से त्रस्त
मियां बीवी दोनों आते हैं मेरे पास। कभी
बीवी कसूरवार होती है और मियां कहता है
कहता है मेरे साथ तो इसने ऐसा कर दिया।
मैंने इसे एक बार पहले माफ़ किया था। दूसरी
बार तब किया था। तीसरी बार अब यह फिर यही
गलती कर रही है। कब तक करूं? कहता है मैं
छोड़ सकता नहीं। मेरे बच्चे बड़े
ठीक है। कभी बीवी आती है कहती जहां देखो
वहां शुरू हो जाते हैं। पहले इनका मेरी
बहन के साथ था। बाद में अब इन्होंने बाहर
वो कोई देख ली। कोई आता है कोई कहता है
मेरी सेक्रेटरी रख ली इन्होंने तो उसके
साथ यह लगे हुए हैं। यह रोज के खेल हैं।
इस चीज को ठीक किया जा सकता है। बस एक दो
बातें समझानी होती हैं कि इसकी वजह से
उसको नुकसान क्या हो रहा है और एक या दो
उपाय होते हैं जो कि इस लाइन से वापस ले
आते हैं। और अगर इस तरह के आपके घर में भी
कोई भी शख्स है चाहे औरत है चाहे आदमी है।
तो चंद्र मंगल अच्छा कर लीजिए।
चंद्र मंगल अच्छा करने का एक ही तरीका है
कि रोज
दूध, पानी और शहद
यह मिलाइए और रोज शिवलिंग पे चढ़ाइए।
और उसके साथ में जो मीठी फुलियां होती है
ना मीठी खील जिनके ऊपर चीनी चढ़ी होती है
यह हर रोज मंदिर जाकर प्रसाद वाले प्रात
में डाल दीजिए वो बढ़ता रहेगा। यह दो उपाय
करके देखिए।
मैं यह तो नहीं कहता कि खत्म हो जाएगा।
लेकिन यह भावना जो 100% है ना वो 10% पे
जरूर आ जाएगी। और यह 10% भी आ गई तो बेटा
बहुत बड़े बचाव हो जाएंगे। बहुत बड़े और
अगर बिल्कुल बिगड़ा हुआ रूप जिसे कहते हैं
शुक्र राहु का मेल राहु का सातवें स्थान
में शुक्र का पितृदोष अगर यह बड़ी-बड़ी
चीजें हैं यह बिना सिचुएशन देखे और बिना
उस पूरे सिम्टम्स के उपाय किए बिना यह ठीक
नहीं होती ठीक है तो उस सिचुएशन में आपको
किसी अच्छे एस्ट्रोलॉजर को मिलना ही
पड़ेगा या एस्ट्रो साइंस पे जाइए उस इंसान
की डेट ऑफ बर्थ टाइम बर्थ प्लेस डालिए ऐप
के अंदर ठीक है डालिए आप देखिए कि अगर
आपको लग रहा है कि यह ऐसा ही है और आपने
देख भी लिया आपको सामने लिखा मिलेगा
और यह जो इसका कर्म है या तो लिखा मिलेगा
कि आपके संबंध कहीं और होंगे और वह आपके
लिए बहुत लकी साबित होगा और आपके लिए जीवन
में फायदा देगा। या तो यह इस तरह की भाषा
लिखी मिलेगी और या फिर यह लिखा मिलेगा कि
आप इस तरह के संबंध में होंगे। इसका
खामियाजा आपके जीवन साथी को भी भुगतना
पड़ेगा। उसकी शारीरिक सर्वे और आपके भी
रुपए पैसे प्रॉपर्टी स्वास्थ्य और आपके
हालात जो कि खराब होने वाले हैं या हो
चुके हैं वह आपको पेट लिखे मिलेंगे कि यह
वाले हालात आपके हो चुके होंगे।
तो यह वाला जो सुख है शारीरिक सुख बेटा
इसके अंदर आदमी ढूंढता तो मानसिक सुख है
लेकिन यह शारीरिक सुख के साथ जुड़ा हुआ है
हो और यह जो चीज यह दुख देने वाली भी होती
है और सुख देने वाली भी होती है। अब किसकी
किस्मत में सुख देने वाली है? तो बेटा वह
तो सारे मस्त है। लगे हुए हैं। और जिसकी
दुख देने वाली है उसका घर नर्क बन चुका
है। उसकी कमाई नर्क बन चुकी है। उसका शरीर
नर्क बन चुका है। समझ गए ना? तो यह एक ऐसी
चीज है आप किसी को समझा के रोक दो यह नहीं
है। क्योंकि प्रवचन देने वाले स्वयं इसमें
लिप्त है और प्रवचन सुनने वाले लिप्त हैं।
वो वहीं वहीं बस ठीक है। जैसे ही उठ के
बाहर निकलते हैं उनका फिर अपना जीवन और यह
जो मन से उठने वाली ये जो विचार है ना यह
उनको जीने नहीं देते। वहीं पर ले जाके फिर
खड़ा कर देते हैं। इसीलिए अपनी-अपनी जन्म
कुंडली दिखाते रहो और सुखी रहो। मैं इतना
ही बोल सकता हूं। और या फिर यह जो मैंने
दूध, पानी, शहद का जो उपाय बताया है, इसको
आजमा के देखिए। देखिए कितना फर्क पड़ता
है।
गुरुदेव एक तरफ तो ऐसे लोग हैं जिनके पास
लड़कियों की कमी नहीं है या ऐसी लड़कियां
हैं जिनके पास लड़कों की कमी नहीं है।
लेकिन एक तरफ वो लोग भी हैं जो अच्छा कर
रहे हैं जीवन में। अच्छे इंसान हैं। लेकिन
फिर भी उनको कोई जीवन साथी नहीं मिल रहा।
उनको लड़का नहीं मिल रहा, लड़की नहीं मिल
रही। तो उन लोगों के लिए क्या उपाय है? उन
लोगों को क्या करना चाहिए? बेटा पहले तो
मैं इसका जवाब दे दूं। हरियाणा में एक
कहावत है। ढे ढेर तो गंगा जी पे टोले है।
यानी कि अपनी मानसिकता के इंसान को इंसान
कहीं भी खोज लेता है।
मान लो जिनके पास बहुत लड़के हैं या जिनके
पास बहुत लड़कियां हैं। वो चाहते ही इनको
है।
समझ गए ना? तो उनको मिल भी जाते। ये जो
बेचारे बिल्कुल सीधे साफ और अच्छे कर्म
करने वाले इनकी मानसिकता यही है कि एक
बहुत अच्छा वफादार जीवन साथी हमें कोई मिल
जाए
जी
बेटा ये दुनिया में संख्या ही कम है तो
उनको ढूंढने में बड़ी तकलीफ होती है। या
तो मां-बाप संस्कारी घर से ढूंढ के साथ
में लगा देते हैं और अगर मां-बाप और
रिश्तेदार भी इसमें सपोर्ट ना करें बड़ा
मुश्किल हो जाता है। ये सच्चाई है। दुनिया
की सच्चाई को देखते हुए बेटा वह बहुत
देर-देर लगाते हैं रिश्तों को ढूंढने में।
ठीक है? कई बार तो यह होता है और या फिर
अगर जन्म कुंडली के 10वें दूसरे और छठे घर
में मैक्सिमम ग्रह बैठे हुए हैं तो बेटा
ऐसा इंसान सिर्फ काम और अच्छे काम करने के
लिए पैदा होता है। वो शादीशुदा जिंदगी के
सुख भोगने के लिए तो पैदा ही नहीं हुआ
होता। ठीक है ना? तो उस अवस्था के अंदर
बेटा यह लोग काम में अपने काम के पैकेज
में सुख कमाने में दुनियादारी के अंदर
अच्छा चलने में इनके कोई कमी नहीं होती।
लेकिन इनके नसीब में नहीं होता कि विपरीत
लिंगी का सुख इनको मिले। उनकी शादियां तय
होती हैं, टूट जाती हैं। देखने जाते हैं,
पूरी बात बनती है। एंड पे जाकर सामने वाले
मना कर देते हैं या देखने जाते हैं, उसको
एंड तक चलते या देखते हैं और लास्ट में
इनको कोई कमी नजर आती है या स्वयं तोड़
देते हैं। इस तरह के हालात जीवन में चलते
ही रहते हैं। इन लोगों के जब तक कि
एस्ट्रोलॉजिकल उपाय ना हो जाए, जो चीज
बाधा है, या तो उसको ना उसको हटाया जाए या
फिर जो योग है नहीं, उपायों के द्वारा वह
योग बनाया जाए। हम तब जाके इनकी शादियां
होती हैं वैसे नहीं होती और जो जिनके पास
बहुत सारे हैं बेटा उनको कोई जरूरत भी
नहीं होती।

Tuesday, 17 February 2026

कुंडली का वो योग जो बना देता है रातों रात सोशल मीडिया स्टार

 

गुरुदेव जी समाज और सोशल मीडिया की एक ऐसी सच्चाई सामने रखते हैं, जिस पर बहुत कम लोग ध्यान देते हैं। क्यों आज के दौर में अजीब हरकतें करने वाले लोग जल्दी प्रसिद्ध हो जाते हैं, जबकि समझदार, विद्वान और गहरी सोच रखने वाले लोग पीछे रह जाते हैं? गुरुदेव बताते हैं कि इसके पीछे केवल ट्रेंड या एल्गोरिदम नहीं, बल्कि व्यक्ति की मानसिकता और ग्रहों का समय भी अहम भूमिका निभाता है। इस पॉडकास्ट में शनि और मंगल के अशुभ प्रभाव से जुड़ी समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जैसे स्किन का खराब होना, बालों का जल्दी सफेद होना, पिंपल्स, आत्मविश्वास की कमी और पेट से जुड़ी परेशानियां। साथ ही बरगद, दूर्वा, देसी घी और दान से जुड़े ऐसे सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं, जो जीवन में स्थिरता और मजबूती लाते हैं। करियर और रिश्तों में बार-बार आ रही रुकावटों के पीछे छिपे ग्रह दोषों और उनके व्यावहारिक समाधान इस पॉडकास्ट को बेहद खास बनाते हैं। यह वीडियो केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन को समझने और सुधारने का मार्ग दिखाता है।जो यूर्स होते हैं वो रातोंरात फेमस हो
जाते हैं। उनकी कुंडली में ऐसा कौन सा योग
है? जो सच में बहुत समझदार और
इंटेलेक्चुअल हैं लोग जो साइंस को विधि को
विधान को सामाजिकता दुनियादारी को समझते
हैं वो जब किसी चीज का कोई प्रवचन करते
हैं ना तुम जाकर देखो सबसे कम व्यू उन्हीं
रील्स के हैं और जो सिर्फ चाटुकारिता में
लिपटी हुई रील बनाते हैं और एक दो श्लोक
साथ में गढ़ देते हैं जो कि सामने वाले को
नहीं समझ आते कि यह श्लोक में क्या बोला
है उनकी रील चल जाती गुरुदेव ग्रहों को
ठीक करके या फिर कुछ ऐसे उपाय करके क्या
हम अपनी स्किन को भी अच्छा कर सकते हैं?
जब तक हर शनिवार को तवा, चिमटा या अंगीठी
इनमें से कोई भी एक चीज दान देनी शुरू
नहीं करते तब तक इनकी स्किन ग्लो ही नहीं
करती।
जिनको ना तो कामयाबी मिल रही है करियर
में। ऐसे लोगों को क्या करना चाहिए? चंद्र
मंगल को अच्छा करना बहुत जरूरी है। और
चंद्र मंगल को अच्छा करने के लिए देसी घी
का हलवा दूध में बना करके मंदिर चढ़ा के
बांटते रहना चाहिए। सोमवार या मंगलवार
[संगीत] का दिन चुनते हैं।
गुरुदेव आजकल हम Instagram पर देखते हैं
कि इतने सारे इन्फ्लुएंसर्स रातोंरात फेमस
हो जाते हैं। जो यूर्स होते हैं वो
रातोंरात फेमस हो जाते हैं। वॉग्स बनाते
हैं। तरह-तरह की चीजों के बारे में
इंफॉर्मेशन देते हैं। तो रातोंरात फेमस
कैसे हो जाते हैं? उनकी कुंडली में ऐसा
कौन सा योग है जो उन्हें रातोंरात फेमस
बनाता है?
पर ये जितने फेमस हुए
जो आज से 5 साल पहले फेमस थे क्या आज हैं?
नहीं नाम निशान भी ढूंढने से नहीं मिल रहा
है ना उसका कारण क्या है
जो सच में बहुत समझदार और इंटेलेक्चुअल है
लोग जो साइंस को विधि को विधान को
सामाजिकता दुनियादारी को समझते हैं वो जब
किसी चीज का कोई प्रवचन करते हैं ना और
किसी अच्छी चीज को समझाते हैं तुम जाके
देखो सबसे कम व्यू व्यू उन्हीं रील्स के
हैं।
सबसे कम व्यू उन्हीं रील्स के हैं। उसके
पीछे का रीज़ उनको दुनिया के अंदर कामयाब
सिर्फ 20% जो लोग हैं ना वो देखते हैं।
क्योंकि उन्हीं को उनकी बात समझ आती है।
80% जो फेलियर लोग हैं जिनकी अपनी
मानसिकता किसी काम की नहीं है। जो अपने आप
को नहीं संभाल सकते। अपनों को नहीं संभाल
सकते। अपने कोई हालात को नहीं संभाल सकते।
वो 80% लोग हैं बेटा। और यह जो अटपटी सोच
के साथ एक फनी सा कुछ करके जो रील बना दी
जाती है ना यह 80% लोग देखने वाले हैं।
तो 100 में से इनको सिर्फ 20 लोग ही
देखेंगे। इनको 100 में से 80 लोग देखेंगे।
तो 150 करोड़ की जनता में से जोड़ के
देखना कि अब कितने व्यू मिलेंगे एक अच्छे
समझदार को और कितने एक बेकार सी रील को
व्यू मिलने वाले
जी
समझ गई ना इसका रीजन ये है और ये सोशल
मीडिया साइटों ने पैसे भी उन्हीं के लिए
रखे हुए हैं जिनकी रील ज्यादा चल जाए
उन्हें पता है समझदारों की चलनी ही नहीं
चलनी उनकी है जो खुद गरीब है और पूरी जी
जान लगा देंगे ये कोई भी एक रील को हिट
कराने के लिए। इसलिए आज आप मॉल पे देखो,
सड़कों पे देखो, जंगल पे देखो, पहाड़ियों
के साइड पे देखो, बिल्डिंगों पे चढ़ के
छलांग तक मार देते हैं। कहीं गिर जाते
हैं, एक्सीडेंट हो जाता है इनका। बेटा
ऐसीऐसी मानसिकता के लोग लगे हुए हैं। पीछे
तो अभी एक चलन चला था। गाड़ी है रोड के
बीचोंबीच खड़ी। तलवार लेके आए उसके साथ
केक काट रहे हैं। [हंसी]
किसकी? कोई समझदार शर्मदार इंसान तो नहीं
ये काम कर सकता। है ना? [हंसी]
तो अब बताओ यह बिल्कुल अलग सी चीज करके यह
एक समझदार के तो दिमाग में भी नहीं आता।
यह शरारती दिमागों में आता है और शरारती
फनी होते हैं भाई। ठीक है? और कोई भी जो
पल भर का एंटरटेन कर जाए ऐसी रील को ही
देखना चाहता है। जो एक प्रवचनकर्ता कहीं आ
गया ना उसमें उसे वह स्किप मारते हैं। ठीक
है? अब प्रवचनकर्ता में भी दो तरह के हैं
बेटा। जो रियल विज्ञान समझाने लगे उसकी
रील तो चलनी ही नहीं
और जो सिर्फ एक
चाटुकारिता में लिपटी हुई रील बनाते हैं
और एक दो श्लोक साथ में गढ़ देते हैं जो
कि सामने वाले को नहीं समझ आते कि ये
श्लोक में क्या बोला है। उनकी रील चल जाती
है। ठीक है? तो बेटा इसका तो मैं विधान
बताऊं क्या? और इसका जन्म कुंडियों से कोई
संबंध भी नहीं है। हां संबंध है वो इंसान
जो आध्यात्मिक भी है, समझदार भी है जिसकी
जिंदगी में पहले कोई अच्छा समय नहीं आया
महादशा के हिसाब से अगर इसमें मशहूर होने
का समय आ गया, सुख पाने का समय आ गया तो
वो लोग निकल जाते हैं। ठीक है? और यह जो
80% वाले हैं बेटा इनकी तो कुंडली ही खराब
होती है और जिसकी वजह से इनकी कुंडली में
बहुत कम देर के लिए अच्छा समय आता है।
ज्यादा देर के लिए आता ही नहीं। तो इसीलिए
यह लोग आते हैं साल, 2 साल, तीन साल में
गायब हो जाते हैं। ठीक है? फिर यह बड़े
नहीं हो पाते। यह तभी बड़े बनेंगे कि इनकी
कुंडली के अंदर मशहूर होने का योग तो है
लेकिन ग्रहों के टकराव को जब तक ठीक नहीं
कर लेंगे यह एस्ट्रोलॉजिकल उपाय करके तब
तक यह जिंदगी को बहुत अच्छा नहीं चला
सकते। ठीक है? ये चीज इसका जवाब बस इतना
ही बनता है।
गुरुदेव ग्रहों को ठीक करके या फिर कुछ
ऐसे उपाय करके क्या हम अपनी स्किन को भी
अच्छा कर सकते हैं? क्योंकि आजकल हम देखते
हैं कि हर जगह पर स्किन केयर प्रोडक्ट्स
बहुत ज्यादा इन है और ज्यादातर यूथ यही
चाहता है कि वो अच्छा दिखे। उनकी स्किन
अच्छी लगे। तो क्या ग्रह इसमें बहुत बड़ा
योगदान देते हैं?
अब मैं तेरे को एक बात बताता हूं बेटा।
सारा कुछ किया धरा तो ग्रहों का ही है। हम
जिस वक्त पैदा हुए उस तरह के जिस तरह के
आपकी कुंडली के अंदर गए बैठ के सब कुछ
उन्होंने ही करना है। अब मैं तेरे को पांच
सात चीजें बताता हूं।
शनि का संबंध लग्न के साथ में हो गया
खराब। शनि का। इंसान की स्किन ड्राई रहती
है। आंखें कमजोर होने लगती है। बाल बहुत
जल्दी पकने लगते हैं। ठीक है? पेट भी खराब
रहता है। जब वो बड़ी उम्र में हो जाते हैं
तो उनकी कमर पांव में दर्द भी होता है। तो
यह कभी स्किन से सुंदर नहीं लगते।
ठीक है? यह जब तक हर शनिवार को तवा, चिमटा
या अंगीठी इनमें से कोई भी एक चीज दान
देनी शुरू नहीं करते। और जब तक बरगद के
पेड़ के ऊपर दूध पानी मिलाकर के चार दाने
चीनी के डाल के ये बरगद के पेड़ पर चढ़ाने
नहीं लगते और चढ़ाकर गीली मिट्टी का तिलक
माथे पे नहीं लगाने लगते तब तक इनकी स्किन
ग्लोई नहीं करती। वाइट होने लगे बाल वो
कंट्रोल में ही नहीं आते। आंखों पे चश्मा
लगता ही लगता है। ठीक है? क्योंकि ये शनि
ने लग्न में बैठ के सूर्य और मंगल दोनों
को खराब कर दिया। ठंडा कर दिया। ठीक है?
शरीर में पूरी गर्मी नहीं बनी। तो अगर
शरीर में पूरी गर्मी नहीं बनी तो क्या
होगा? यह जीवन साथी को भी सेटिस्फाई नहीं
रख सकते। इनका स्वभाव और फिजिकली यह उतना
सेटिस्फाई नहीं रख पाते। तो इनके साथ यह
भी प्रॉब्लम हो गई। तो इसके साथ ये जो
मैंने दो उपाय बताए तवा, चिमटा, अंगीठी और
बरगद के पेड़ के ऊपर दूध, पानी चढ़ाकर चार
दाने चीनी के मिलाकर के चढ़ाना और गीली
मिट्टी का तिलक लगाना। यह दो उपाय। तीसरा
एक पतासा घर से लेके जाए हफ्ते में तीन
बार। ठीक है? बरगद के पेड़ का पत्ता
तोड़िए। उसमें से दूध निकलता है। वो दो या
तीन बूंद पतासे के अंदर गिरा के बेटा
हफ्ते में तीन बार यह खा लो। ये आपकी दवाई
है जो हिम्मत कॉन्फिडेंस सब कुछ देगी और
साथ में आपके बाल भी काले होने देगी और
स्किन के अंदर ग्लो देगी और बुढ़ापे में
कमर पापां पांव का दर्द नहीं होने देगी।
तो इसका ये कई तुमने लोग देखे होंगे उनके
पिंपल्स ही निकलते रहते हैं। पिंपल्स उनके
इतने निकलते हैं कि उनका चेहरा ब्रश जाता
है। इसको बोलते हैं मंगल खराब। और यह मंगल
खराब वालों के पेट के अंदर गर्मी बड़ी
होती है। इनको गैस, एसिडिटी, कब्ज भी होती
है। इनको गुस्सा भी जल्दी आता है। समझ गए?
काम करने लगते हो तो काम दबा के करते हैं।
समझ गए? लेकिन यह मंगल खराब है। किसी ना
किसी तरह से हमारी जठ रखनी को खराब कर रहा
है। खून के अंदर इंफेक्शन भी पैदा कर रहा
है। इनको ठीक करने के लिए क्या करना है?
वही दूरवा घास जो परमात्मा को चढ़ाई जाती
है। है ना? गणपति जी पे चढ़ाते हो ना
दूरघास।
जी। वही धुर्वा घास लो
इसका ना थोड़ा सा पानी डाल के 510 ग्राम और
10 एक डंडियां लेके इसकी यह मिक्सी के
अंदर ग्राइंड कर लीजिए या सिलबट्टे पे कूट
के इसको पानी के साथ इकट्ठा कर लीजिए और
इसको निचोड़ के घास को अलग फेंक दीजिए जो
पिसी हुई है उसका पानी बेटा दो-ती महीने
पी के तो देखो पेट की सारी गर्मी को शांत
करके स्किन के ऊपर बिल्कुल ग्लो ले आएगा
सब अच्छा रह
और तीसरी चीज
जो डॉक्टरों ने समझाते समझाते जहर बना दी
और वो क्या देसी घी को जहर बना दिया हार्ट
अटैक हो जाएगा रगों में फैट जम जाएगी ये
है वो है हर एक इंटर अगर पढ़े लिखे हो
उन्हीं को मानते हो ना जाके लेटेस्ट
रिसर्च निकाल के देखना
कि देसी घी से बड़ा अमृत कोई नहीं है धरती
पर डॉक्टर स्वयं खाने लग गए हैं। लेकिन
हमारी मानसिकता पीछे अटकी हुई है। जो
इंसान रोज देसी घी खाता है उसके चेहरे पर
ग्लो आएगा और जो बाहर से क्रीमें लगाता है
ना वो अंदर से सूखता चला जाएगा और एक दिन
बीमारियों का घर बनेगा।
पीछे तो इतना साइकोलॉजिकल वार किया गया ऐड
के थ्रू। मेरे को याद है वो ऐड। ओहो देखो
इसके चेहरे पर फैट है। यह देखो घी आया हुआ
है। तो फेस वॉश से मुंह धुलवाते थे। कहते
हां ये ठीक है। इसमें अब चमक नहीं है। अरे
बड़े बुजुर्ग आज तक कहते आए हैं कि भाई
इसके चेहरे का नूर देखो। चेहरा चमक रहा
है। यानी अंदर से फिट है इंसान।
और ये सड़े हुए चेहरे वालों को फिट बताने
लग गए। तो बेटा सारा मार्केटिंग के खेल के
अंदर फंस के लोगों का हाल खराब कर दिया।
अब तो अच्छा यह है कि पेट में गर्मी है तो
धुर्वाघाता से ठीक कर लो। शनि खराब है तो
तवा, चिमटा, अंगीठी का उपाय करके बरगद के
पेड़ की शरण में जाकर के उसको ठीक कर लो।
मतलब ही नहीं बीमारियां बचे और मतलब ही
नहीं कि आपका चेहरा ना चमके। पर इन दोनों
ही सीन में देसी घी खाना बहुत जरूरी है।
देसी घी खाओगे तो पूरा चेहरा चमचम करेगा।
अच्छा होगा, सुंदर दिखोगे। नहीं तो बेटा
शादी वाले दिन हल्दी का उपटन लगा के एक
दिन पीले हो भी जाओगे तो क्या मिलेगा? बाद
में फिर तो सड़ी हुई स्किन के साथ ही जीना
है। ठीक है? तो इसीलिए हमेशा के लिए
अच्छे, सुखी और तंदुरुस्त बनो। घी खाते
रहो। गुरुदेव एक प्रश्न उन लोगों के लिए
जिनको ना तो कामयाबी मिल रही है करियर में
ना उनकी ग्रोथ हो रही है ना उनको कोई
अच्छा लाइफ पार्टनर मिल रहा है यानी चारों
तरफ से मुसीबतें उन लोगों को घेर चुकी
हैं। ऐसे लोगों को क्या करना चाहिए?
इसमें ना दो तरह के लोग हैं बेटा।
एक वह है कि जो बृहस्पत के मारे हुए हैं।
यह लोग वह हैं जो बहुत ज्यादा पूजा पाठ
में चले गए हैं। दिन रात घंटियां खड़काते
हैं। घर में ही आरतियां करते हैं। भगवानों
को ले बैठे हुए हैं। उनकी मानसिकता में यह
है कि भगवान ठीक करेगा।
इनको रियलिटी में इससे दूर होना होगा।
और उनको प्रैक्टिकल होना पड़ेगा कि मैं 5
मिनट परमात्मा को देता हूं। बाकी 23 घंटे
55 मिनट मैं अपने काम को दूंगा, अपनी नींद
को दूंगा, अपने आराम को भी दूंगा, अपनी
जरूरतों को भी दूंगा और अपने फर्जों को भी
दूंगा। इनको वो छोड़ना पड़ेगा। ठीक है? और
ऐसी अवस्था के अंदर
उनको चंद्र मंगल को अच्छा करना बहुत जरूरी
है। और चंद्र मंगल को अच्छा करने के लिए
उनको
देसी घी का हलवा दूध में बना करके मंदिर
चढ़ा के बांटते रहना चाहिए। सोमवार या
मंगलवार का दिन चुन लें। ठीक है? तो इन
लोगों पे खुशहाली आने लगेगी घर पे। नहीं
तो यह एक ही बात कहते हुए दुनिया से
जाएंगे कि हमने तो परमात्मा को बहुत पूजा।
कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया। उसके
बावजूद परमात्मा ने हमें क्या दिया? एक तो
यह लोग हैं। दूसरे लोग दूसरे प्रकार के जो
लोग होते हैं बेटा यह शनि खराब के लोग
हैं। यह बहुत ज्यादा पूजा पाठ नहीं करते।
और कई तो परमात्मा को मानते भी नहीं।
लेकिन उसके बावजूद इनकी मानसिकता होती है
गुस्से वाली, चिड़चिड़ेपन वाली और दूसरों
में कमी निकालने वाली और एक अलग प्रकार की
अकड़ कि हमारी भी तो इज्जत है। यह जो
हमारी भी इज्जत है और काम बड़े छोटे-छोटे
कर रहे हैं। बेटा इन लोगों को भी अमीर
बनाना संभव नहीं हो पाता। क्योंकि ये इसी
चीज में फंसे हुए हैं कि हम अनखी लोग हैं।
समझे? और ठीक है परमात्मा के आगे हाथ जोड़
देते। इससे फालतू नहीं कुछ खास करते।
कोई पूजापाठ का खास समय आए तो उसमें भी यह
शिरकत कर लेते हैं। लेकिन बहुत ज्यादा
नहीं करते।
यह वह लोग हैं जो शनि के मारे हुए हैं। इन
लोगों को ही शनि मंदिर जाकर के तेल चढ़ाकर
उड़द साबुत काले चने, सरसों का तेल, काला
कपड़ा लोहा यह वहां पर अर्पित करके और
उसके बाद में इनको पीपल के पेड़ के ऊपर जल
चढ़ाना चाहिए हर बृहस्पतिवार को और हर
शनिवार को शनि के दान देने चाहिए और हर
मंगलवार को मिठाई बांटनी चाहिए। यह जब तक
यह वाले उपाय नहीं करेंगे तब तक इनकी अकड़
नहीं टूटती। और जिनकी अकड़ नहीं टूटेगी
बेटा सामने वाला काम क्यों देगा? समझ गए?
क्योंकि सामने वाला इंसान को ऐसा चाहता है
जो फ्लैक्सिबल हो। जो आराम से समझ भी जाए।
आराम से समझ के कहीं-कहीं साथ भी दे। ठीक
है ना? तो ऐसा लोग सबको चाहिए होता है। और
अकड़ने वाला बंदा तो किसी को नहीं चाहिए।
वह अपनी इज्जत की दुहाई लेके अकेला ही
समाज में चलता है। उस वक्त तो वह साथी भी
नहीं मिलते। है ना? तो यह दो उपायों को
खास तौर पर समझें कि अगर बहुत ज्यादा पूजा
पाठ कर करके आपने अपना हाल खराब कर लिया
तो क्या करना है और अगर अकड़-अकड़ के अपना
हाल खराब कर लिया तो क्या करना? उपाय
मैंने दोनों दे दिए हैं। ठीक है? तो ये
करिए इनके बाद गरीब के पास गरीबी नहीं
रहेगी। समझे? और जो फेलियर इंसान है उसको
कामयाबी की सीढ़ी जरूर मिलेगी। ठीक है?
करके देखिए। तब देखिए जरा इस ज्योतिष का
जलवा क्या होता है।

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